हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,इमाम ए जुमआ केराकत चौरा जौनपुर; मौलाना हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सय्यद वसी अहमद ज़ैदी प्रिंसिपल जामिया अली मुर्तजा व शिया यतीम खाना जौनपुर ने नमाज़ की अहमियत बयान करते हुए मुसलमानों से इबादत की पाबंदी और आपसी एकता कायम रखने की अपील की उन्होने कहा कि नमाज़ इंसान को अल्लाह से जोड़ने वाली सबसे अहम इबादतों में से है और इसकी पाबंदी इंसान के किरदार और समाज की इस्लामी पहचान को मज़बूत करती है।
ख़ुत्बे में क़ुरआन-ए-करीम की इस आयत को विशेष रूप से पेश किया गया,
وَاعْتَصِمُوا بِحَبْلِ اللَّهِ جَمِيعًا وَلَا تَفَرَّقُوا وَاذْكُرُوا نِعْمَتَ اللَّهِ..
और तुम सब अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से थाम लो और आपस में तफ़रक़ा न डालो।
(सूरह आले-इमरान, 3:103)
उन्होने कहा कि आज मुसलमानों को अपने व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में नमाज़ की अहमियत को समझने की ज़रूरत है। नमाज़ केवल एक धार्मिक फ़रीज़ा नहीं, बल्कि इंसान के अंदर तक़वा, अनुशासन, सब्र और अल्लाह पर भरोसा पैदा करने का ज़रिया भी है। अगर मुसलमान नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बना लें तो उनके अंदर नेकी, ज़िम्मेदारी और आपसी भाईचारे की भावना और मजबूत हो सकती है।
जुमआ के दूसरे ख़ुत्बे में मुस्लिम उम्मत के बीच इत्तेहाद की अहमियत पर भी ज़ोर दिया गया। कहा गया कि मुसलमानों की ताक़त उनकी एकता में है और आपसी मतभेदों को बढ़ावा देने के बजाय एक-दूसरे के अधिकारों, सम्मान और धार्मिक भावनाओं का ख़याल रखना चाहिए। क़ुरआन भी मुसलमानों को एकजुट रहने और आपस में विभाजन से बचने की ताकीद करता है।
मौलाना सय्यद वसी अहमद ज़ैदी ने कहा कि फ़िलिस्तीन और दूसरे क्षेत्रों में जारी घटनाओं के मद्देनज़र मुस्लिम उम्मत को अपने मतभेदों से ऊपर उठकर मज़लूमों के समर्थन और इंसाफ़ के लिए एकजुट होना चाहिए। उन्होंने ज़ुल्म और अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने तथा दुनिया में अमन और इंसाफ़ की स्थापना के लिए दुआ की।
ख़ुत्बे के समापन पर अल्लाह तआला की बारगाह में मुस्लिम उम्मत की हिफ़ाज़त, मज़लूमों की मदद, फ़िलिस्तीन के लोगों की कामयाबी और ज़ालिम ताक़तों के ज़ुल्म के अंत की दुआ की गई। साथ ही अमेरिका और इज़राइल की ज़ालिम नीतियों के ख़ात्मे और उनके अत्याचार से इंसानियत को निजात मिलने की दुआ भी की गई।
मौलाना ने अंत में मुसलमानों को नमाज़ की पाबंदी करने, क़ुरआन से अपना रिश्ता मजबूत करने, आपसी इत्तेहाद बनाए रखने और समाज में अमन, भाईचारे तथा इंसाफ़ को बढ़ावा देने की नसीहत की।
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